RBI गवर्नर के प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें, जानिए बाजार और आप पर क्या पड़ेगा असर?

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)  के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikant Das) ने कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of corona) के बीच आज प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. RBI Governor ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर पहले से कहीं ज्यादा घातक है. कई राज्यों में विभिन्न तरह के प्रतिबंधों के चलते इसका इकोनॉमी पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा. आरबीआई इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है. दास ने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद इकोनॉमी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया और अच्छी रिकवरी देखने को मिली.

 इन प्रमुख बातों के जरिए समझिए शक्तिकांत दास ने क्या कहा….
31 मार्च, 2022 तक रेपो रेट पर 3 साल तक की अवधि के साथ 50,000 करोड़ रुपए की ऑन-टैप लिक्विडिटी विंडो की योजना शुरू की गई है. योजना के तहत बैंक वैक्सीन निर्माताओं, मेडिकल सुविधाओं, अस्पतालों और मरीजों सहित संस्थाओं को सपोर्ट कर सकते हैं. 35000 करोड़ रुपए की गर्वमेंट सिक्योरिटीज की खरीद का दूसरा चरण 20 मई को शुरु किया जाएगा.

 बैंकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि कमजोर क्षेत्रों में तेजी से ऋण बढ़ाया जा सके. बैंक अपनी बैलेंस शीट में एक COVID लोन बुक बनाएंगे और आरबीआई के कोविड बुक के बराबर रिवर्स रेपो रेट पर और पैसा दे सकते हैं.

 25 करोड़ रुपये तक के कर्जदार, जिनका पुनर्गठन पहले नहीं किया गया था, 30 सितंबर, 2021 तक पुनर्गठन के लिए विचार किया जाएगा. रिजोल्यूशन 1.0 का कार्यकाल दो साल तक बढ़ाया जा सकता है.

एमएफआई को उधार देने वाले स्मॉल फाइनेंस बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जाना है. लघु वित्त बैंकों ने माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) को ऋण दिया जाना प्राथमिकता के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा यह COVID-19 महामारी के बीच होगा. छोटे वित्त बैंकों के लिए यह सुविधा 31 मार्च, 2022 तक उपलब्ध होगी.

 देश में COVID-19 मामलों की दूसरी लहर के बीच, छोटे वित्त बैंकों के लिए एक स्पेशल लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (SLTRO) बनेगा. केंद्रीय बैंक रेपो दर पर 10,000 करोड़ रुपये के विशेष अभियान का संचालन करेगा. RBI ने इस योजना के लिए प्रति कर्जदार 10 लाख रुपये की सीमा निर्धारित की है. यह 31 अक्टूबर, 2021 तक खुला रहेगा.

बाजार में पूंजी और नकदी बढ़ने से मांग बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई ने इन प्रयासों से बाजार में पूंजी और नकदी का प्रभाव बढ़ेगा. बैंकों द्वारा ज्यादा लोन देने और आरबीआई द्वारा मार्केट में पैसा डालने से लोगों तक ज्यादा पैसा पहुंचेगा. लिहाजा मांग में तेजी आने की संभावना बनेगी. पूंजी के संकट से गुजर रहे स्मॉल और मीडियम उद्योगों को भी सपोर्ट मिलेगा. इस वजह से कोरोना संकट से निपटने में मदद मिलेगी.

विभिन्न तरह के प्रतिबंधों से खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है. इसलिए सरकार चाहती है कि इनको ज्यादा से ज्यादा मदद मिल सके. साथ ही, लोन रिपेमेंट में राहत मिल सके.

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा स्थितियां बदल गई हैं और यह मजबूत आर्थिक सुधार के निचले पायदान से नए संकट का सामना करने की ओर मुड़ चुकी हैं. जिस विनाशकारी गति से वायरस लोगों को ग्रसित कर रहा है, उसका मुकाबला उतनी ही तेजी और व्यापक कार्रवाई से किया जाना चाहिए जो सोचा समझा, जांचा परखा गया है. इससे सबसे कमजोर सहित विभिन्न वर्गों तक पहुंचा जा सकेगा.

source:news18

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