RIP अज‍ित सिंह: IIT खड़गपुर से बीटेक, IBM के साथ काम करने वाले पहले भारतीय, फिर यूं राजनीति में जमाई धाक

लखनऊ. राष्ट्रीय लोक दल के (Rashtriya Lok Dal) और लोकप्रिय किसान नेता अजीत सिंह (Ajit Singh)  का निधन देश की राजनीति  के लिए एक अपूरणीय क्षति है. 82 साल के अजीत सिंह ने गुरुवार सुबह करीब 6 बजे गुरुग्राम के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. 22 अप्रैल को ही अजीत सिंह कोरोना संक्रमित हुए थे. डॉक्टरों के मुताबिक फेफड़ों में संक्रमण की वजह से उनका निधन हुआ. अजीत सिंह के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम बड़े नेताओं के उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह का जन्म मेरठ में हुआ था. हालांकि उन्होंने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत अपने पिता के बीमार होने पर 1986 में राज्य सभा सांसद के तौर पर की थी. इसके बाद वे सात बार बागपत से लोक सभा चुनाव जीते. वे वीपी सिंह, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी बाजपेयी और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे.

कंप्यूटर साइंस में बीटेक थे अजीत सिंह
अजीत सिंह न केवल सफल राजनेता रहे बल्कि वे एक अच्छे स्कॉलर भी थे. अजीत सिंह ने देश के नाम आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद इलेनॉइस इंस्टिट्यूट पफ टेक्नोलॉजी से एमएस की डिग्री हासिल की. अजीत सिंह पहले भारतीय थे जिन्होंने 1960 के दशक में आईबीएम कंपनी में नौकरी की.

1986 में पहली राज्य सभा पहुंचे
चूंकि अजीत सिंह राजनीति पृष्ठभूमि से जुड़े थे, लिहाजा पिता चौधरी चरण सिंह के बीमार पड़ने पर उन्होंने परिवार की राजनीतिक विरासत को संभाला. 1986 में वे पहली बार राज्य सभा के लिए चुने गए. पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के नेतृत्व में बानी केंद्र की सरकार में  पहली बार केंद्रीय मंत्री बनें. उन्होंने इंडस्ट्री मिनिस्टर का कार्यभार संभाला. नरसिम्हा राव सरकार में खाद्य मंत्री रहे. अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया. मनमोहन सिंह सरकार में वे नागरिक उड्डयन मंत्री बने.

सात बार लोकसभा के लिए चुने गए

जनता दाल में महासचिव के तौर पर राजनीतिक शुरुआत करने वाले अजीत सिंह ने 1999  लोकदल का गठन किया. वे पहली बार 1989 में बागपत से लोक सभा के लिए चुने गए. इसके बाद 2009 तक जितने भी चुनाव हुए अजीत सिंह जीतते रहे. 2014 में उन्हें पहली बार हार का सामना करना पड़ा जब बीजेपी के सतपाल मालिक ने उन्हें हराया. इसके बाद उन्होंने 2019 में मुजफ्फरनगर से लोकसभा का चुनाव लड़ा. इस बार उन्हें बीजेपी के संजीव बालियान ने हराया.

source:news18

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