अब मेरठ में ब्लैक फंगस ने बढ़ाई चिंता, डायबिटीज मरीजों पर ज्यादा खतरा- 10 पॉइंट्स में समझें सारी बात

नई दिल्ली. म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis), ऐसी बीमारी जिसकी चर्चा कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच जारी है. ‘ब्लैक फंगस’ (Black Fungus) नाम से पहचानी जा रही इस बीमारी के हाल ही में दिल्ली, महाराष्ट्र (Maharashtra) और गुजरात के बाद अब उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो मरीज मिले हैं. आंखों में होने वाली इस परेशानी ने एक्सपर्ट्स और कोरोना मरीजों को चिंता में डाल दिया है. हालात इतने चिंताजनक हैं कि इसके संबंध में नेशनल कोविड-19 टास्क फोर्स ने रविवार को एक एडवाइजरी भी जारी की है. अब समझते हैं कि आखिर यह कौन सी बीमारी है, जो डायबिटीज, कोविड-19 के मरीजों को खासा प्रभावित कर रही है.

क्या है म्यूकरमाइकोसिस?

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, म्यूकरमाइकोसिस एक गंभीर, लेकिन दुर्लभ संक्रमण है. इसका मुख्य कारण म्यूकरमाइसीट्स नाम के मोल्ड्स के समूह से होता है. ये मोल्ड्स पूरे पर्यावरण में रहते हैं. ये बीमारी आमतौर पर उन लोगों को अपनी जकड़ में लेती है, जो ऐसी ऐसी दवाएं ले रहे हैं, जो जर्म्स और बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता को कम करती हैं.

10 पॉइंट्स में समझते हैं कि देश में ब्लैक फंगस का हाल क्या हैं-

  1. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने कहा है कि कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स, डायबिटीज के मरीज और कमजोर इम्यून सिस्टम वालों को शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए. इनमें साइनस दर्द या चेहरे के एक तरफ नाक में रुकावट, एक तरफ सिरदर्द, सूजन या सुन्नता, दातों में दर्द या गिरना शामिल है.
  2. जानकार इस बीमारी के तार डायबिटीज से जोड़कर देख रहे हैं. इसमें नाक के ऊपर के हिस्से में कालापन या रंग बदलने वाली इस बीमारी से धुंधला दिखना, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या खांसी में खून आने जैसी परेशानी हो सकती हैं.
  3. ICMR के अनुसार, कोविड-19 के मरीजों को इस तरह के फंगल इंफेक्शन का जोखिम ज्यादा है. इनमें वे मरीज भी शामिल हैं, जो उपचार के दौरान स्टेरॉयड्स ले रहे थे और लंबे समय तक अस्पताल को ICU में थे.
  4. रॉयटर्स से बातचीत में मेंचेस्टर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डेविड डेनिंग बताते हैं ‘ऐसे मामले ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, ब्राजील और मेक्सिको समेत कई अन्य देशों में भी देखे गए हैं, लेकिन भारत में इनकी संख्या काफी ज्यादा है.’
  5. ICMR में वैज्ञानिक अपर्णा मुखर्जी कहती हैं ‘इससे आपको घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस बारे में जागरूक होना होगा कि आपको परामर्श लेने की जरूरत कब है.’
  6. चंडीगढ़ में सेंटर ऑफ एडवांस रिसर्च इन मेडिकल माइकोलॉजी के प्रमुख अरुणलोकी चक्रबर्ती ने कहा कि कोविड-19 से पहले भी ज्यादातर देशों की तुलना में म्यूकरमाइकोसिस भारत में आम था.
  7. मुंबई के मुलुंड स्थित ऑप्थेल्मोलॉजी के प्रमुख पी सुरेश कहते हैं कि उनके अस्पताल में बीते दो हफ्तों में ऐसे कम से कम 2 मरीजों का इलाज हुआ है. ये आंकड़ा महामारी शुरू होने के पहले पूरे साल से करीब दोगुना है. सभी मरीजों को कोविड-19 था और ज्यादातर डायबिटिक थे या इम्यूनोसप्रेसेंट ड्रग्स ले रहे थे. उन्होंने बताया कि कुछ की मौत हो गई है. जबकि, कुछ ने देखने की शक्ति गंवा दी है.
  8. बीते रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें इस संक्रमण के इलाज को लेकर जानकारी दी गई है. अहमदाबाद के संक्रामक रोग विशेषज्ञ अतुल पटेल ने AFP को बताया ‘कोविड-19 इलाज के बाद मरीजों में म्यूकरमाइकोसिस के मामले महामारी से पहले की तुलना में चार गुना ज्यादा हैं.’ पटेल राज्य कोविड-19 टास्क फोर्स के सदस्य भी हैं.
  9. मीडिया रिपोर्ट्स में राज्य के शासकीय अस्पतालों के हवाले बताया गया है कि गुजरात में कुछ 300 मामले सामने आए हैं. इस संक्रमण के सबसे ज्यादा मरीज अहमदाबाद में मिले हैं. राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों को ‘ब्लैक फंगस’ के इलाज के लिए अलग से वार्ड तैयार करने के आदेश दिए हैं.
  10. मुंबई के डीवाय पाटिल अस्पताल के कान, नाक और गला विशेषज्ञ योगेश दाभोलकर AFP को बताया कि इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं काफी महंगी होती हैं. उन्होंने बताया कि इसके इलाज में सर्जरी भी शामिल होती है, जिसमें मृत और संक्रमित टिश्यूज को एंटी-फंगल थैरेपी के जरिए हटाया जाता है.
source:news18
0Shares
Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: