आईएलएंडएफएस और डीएचएफएल जैसी लोन डिफाल्ट वाली चूक अब नहीं होगी, जानिए क्या है वजह

नई दिल्ली. इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) और दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) ने लगातार कई डिफॉल्ट कर देश की वित्तीय व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था. लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा.

देश की दो प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां इस सेक्टर के लिए सेल्फ रेग्युलेटरी ऑर्गनाइजेशन बनाने की पहल कर रही हैं. CARE Ratings और Acuite Ratings & Research ने कॉमन कोड ऑफ कंडक्ट और प्रैक्टिसेज बनाने के लिए एक यूनिट गठित की है.

इस तरह की पहल पहली बार

यह पहला मौका है जब देश में रेटिंग एजेंसियों के लिए एक सेल्फ रेग्युलेटरी बॉडी बनाई गई है. म्युचुअल फंड इंडस्ट्री, बॉन्ड और करेंसी डीलर्स ने अपने लिए पहले ही इस तरह की सेल्फ रेग्युलेटरी बॉडी बनाई है.

सूत्रों के मुताबिक ग्लोबल रेटिंग कंपनियों के निवेश वाली इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) और इक्रा (ICRA) भी प्रस्तावित बॉडी में शामिल होने पर विचार कर रही हैं. दोनों रेटिंग कंपनियां अपनी मूल विदेशी कंपनियों के साथ चर्चा के बाद कोई फाइनल निर्णय लेंगी. India Ratings की पेरेंट कंपनी Fitch और ICRA की Moody’s है.

दूसरी एजेंसियां भी जुड़ेंगी

इस बारे में इंडिया रेटिंग्स ने ईटी के सवालों का जवाब नहीं दिया. इक्रा ने कहा कि यह स्वागत योग्य कदम है. अगर हमें इसमें शामिल होने का ऑफर मिलता है तो हम इस पर सावधानी से विचार करेंगे और फिर मेरिट के आधार पर फैसला लेंगे.

एसोसिएशन ऑफ इंडियन रेटिंग एजेंसीज (AIRA) को नॉट ऑफ प्रॉफिट कंपनी के तौर पर गठित किया गया है और यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) जैसे रेग्युलेटर्स के साथ मिलकर काम करेगी.

केयर रेटिंग्स के एमडी और सीईओ अजय महाजन ने कहा कि फाइनेंशियल वर्ल्ड में फैसला लेने की प्रक्रिया में रेटिंग्स की भूमिका अहम हो गई है. इस एसोसिएशन के जरिए हमारा मकसद सभी स्टेकहोल्डर्स को डेट मार्केट के डेवलपमेंट के लिए साथ लेकर चलना है. Acuite और CARE इस एसोसिएशन के फाउंडिंग मेंबर्स हैं लेकिन मान जा रहा है कि उन्होंने दूसी एजेंसियों को भी इसका हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है.

साल 2018 में IL&FS लोन डिफाल्ट शुरू हुआ

इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर IL&FS ने 2018 में एक के बाद एक कई लोन और बॉन्ड्स के भुगतान में डिफॉल्ट किया था. इसकी शुरुआत अगस्त 2018 में हुई थी. इनसे देश के नॉन बैंक लेंडिंग सेक्टर को हिलाकर रख दिया था. हालांकि निवेशकों को डिफॉल्ट जोखिमों के बारे में आगाह नहीं किया गया था. उसके बाद से क्रेडिट रेटिंग कंपनियों ने अपनी प्रक्रियाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है.

source:news18

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