New Carbon Resource: वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक के कचरे को ‘वनीला’ में बदला

दुनिया में प्लास्टिक (Plastic) का कचरा वैज्ञानिकों के लिए सरदर्द बना हुआ है. प्राकृतिक रूप से इसका अपघटन होता नहीं हैं और इसकी उपयोगिता इतनी व्यापक है कि इसका उपयोग खत्म करना असंभव के बारबर है. प्लास्टिक के अपघटन (Degradation of Plastic) पर कई तरह के शोध चल रहे हैं. वहीं इसके विकल्प खोजने में भी कोई खास सफलता नहीं मिली है. फिर भी हाल के कुछ सालों में प्लास्टिक को बैक्टीरिया (Bacteria) से अघटन करने में कुछ सफलता मिलती दिखी है. इसी कड़ी में अब शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया के जरिए प्लास्टिक के कचरे को खाने योग्य वनीला (Vanilla) में बदलने में कामयाबी हासिल की है.

रासायनिक क्रियाओं की शृंखला

इस खोज ने दुनिया को एक नया कार्बन स्रोत दिया है वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक से छुटकारा पाने के नए तरीके के तौर पर बहुत सी रासायनिक क्रियाओं की शृंख्लाओं के जरिए उपयोग के बाद के प्लास्टिक को वनीला या वनीला फ्लेवर में बदलने सफलता पाई है. यह खोज यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के वैज्ञानिकों की टीम ने हासिल की है.

खास अणुओं में बदलाव
वैज्ञानिकों ने लैबोरेटरी में इंजीनियर्ड ई.कोली बैक्टीरिया का उपयोगकर प्लास्टिक से निकले टेरेफ्थेलिक एसिड अणुओं को ऐसे अणुओं में बदल दिया जो वानीला में स्वाद और खुशबू देने के लिए जिम्मेदार हैं. ग्रीन कैमिस्ट्री में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि प्लास्टिक हमारे समाज में बहुत व्यापक स्तर पर विविध तरह से उपयोग में लाया जाने वाला पदार्थ है.

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वैज्ञानिकों ने उपयोग किए जा चुके PET से वनीला को विशेषताओं वाला अणु तैयार किया है.

अधिक मूल्य में बदलना था उद्देश्य

शोधकर्ताओं ने इसलिए तय किया कि वे इस पर प्रयोग करेंगे कि कैसे प्लास्टिक के कचरे को किसी ऐसी चीज में बदला जा सकता है जिसका अधिक मूल्य हो और औद्योगिक रूप से ज्यादा उपयोगिता हो. यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में बायोटेक्नोलॉजी के वरिष्ठ व्याख्याता और इस अध्ययन के सहलेखक स्टीफन वालेस बताते हैं कि उनका कार्य उस धारणा को चुनौती देता है जिसके तहत प्लास्टिक को एक मुसीबत भरा कचरा माना जाता है.

नया कार्बन स्रोत

वालेस ने कहा कि उनका कार्य दर्शाता है कि प्लास्टिक के कचरे का नए कार्बन स्रोत के तौर पर उपयोग हो सकता है जिसमें उच्च मूल्य के उत्पाद हासिल किए जा सकते हैं. वैज्ञानिकों के पास अब एक ऐसी तकनीक है जिसमें अहम बैक्टीरिया के माध्यम से प्लास्टिक के कचरे को वनीला फ्लेवरिंग में बदला जा सकता है.

वनीला बीन्स का अवयव

शोधकर्ताओं ने बताया कि वनीला वह यौगिक है जो खाने की चीजों में वनीला का फ्लेवर लाता है. यह वनीला बीन्स से निकाला जाने वाला प्रमुख अवयव है. इसलिए हाल ही में प्लास्टिक को वनीला में बदलने वाला प्रयोग चक्रीय अर्थव्यवस्था में उछाल ला सकता है जिसका उद्देशय कचरे को हटाना, उत्पाद एवं पदार्थ की उपयोगिता को कायम रखना और सिंथेटिक बायोलॉजी के सकारात्मक प्रभावों को कायम रखना है. अध्ययन में शामिल विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से बना वनीलिन इंसानों के लिए खाने योग्य रहेगा लेकिन इसके लिए कुछ और प्रयोगात्मक परीक्षणों की जरूरत है.

सूक्ष्म स्तर पर बेहतरीन नमूना

यह अध्ययन रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसकी संपादक एलिस क्रॉफोर्ड ने एक बयान में कहा कि सूक्ष्म स्तर पर संधारणीयता बढ़ाने का यह सूक्ष्मजीव विज्ञान का बहुत ही रोचक उपयोग है. सूक्ष्मजीवों का उपयोग कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक के कचरे को एक उपयोगी सामग्री में बदलना और कॉस्मेटिक एवं खाद्य के लिए विस्तृत उपयोग के लायक बनाना ग्रीन कैमिस्ट्री का बेहतरीन नमूना है.

source:news18
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