Bhoot Police Review: सैफ अली खान और अर्जुन कपूर की फिल्म हंसाएगी या डराएगी? यहां जानिए

नई दिल्ली: बीते सालों में बॉलीवुड में हॉरर कॉमेडी फिल्मों ने दर्शकों का खूब प्यार पाया है.  जिसमें ‘गो गोवा गॉन’, ‘गोलमाल अगेन’ और ‘भूल भुलैया’, ‘स्त्री’, ‘रूही’ के बाद अब सैफ अली खान (Saif Ali Khan), अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor), जैकलीन फर्नांडीज (Jacqueline Fernandez) और यामी गौतम (Yami Gautam) स्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘भूत पुलिस’ (Bhoot Police) अब OTT प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम हो चुकी है. सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर BUZZ बना हुआ है. तो क्या पवन कृपलानी द्वारा निर्देशित ‘भूत पुलिस’ भी इन फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो जाती है, या यह लोकप्रियता चार्ट पर को भुनाने का एक और प्रयास है? आइए जानते हैं…

फिल्म: भूत पुलिस
कास्ट: सैफ अली खान, अर्जुन कपूर, जैकलीन फर्नांडीज, यामी गौतम, जावेद जाफरी, अमित मिस्त्री, जेमी लीवर
निर्देशक: पवन कृपलानी
स्टार: 3/5
कहां देखें: डिज्नी+ हॉटस्टार

मिलिए इन किरदारों से

विभूति (सैफ अली खान) और चिरौंजी (अर्जुन कपूर) भूतों का शिकार करने वाले भाइयों की भूमिका में हैं, जिनकी असली परीक्षा तब होती है जब दो बहनों, कनिका (जैकलीन फर्नांडीज) और माया (यामी गौतम) के धर्मशाला स्थित चाय के बागानों पहुंचते हैं, जहां एक पुरानी ताकतवर आत्मा से उनकी मुलाकात होती है. जिसे कई साल पहले उनके ही पिता द्वारा हरा दिया गया था, कहानी की शुरुआत में ऐसा बताया जाता है कि वह फिर से उभर आया है…?

ऐसी है कहानी

विभूति (सैफ अली खान) और चिरौंजी (अर्जुन कपूर) भूत भगाने वाले भाइयों की भूमिका निभाते हैं, जबकि विभूति को विश्वास है कि भूत जैसी कोई चीज नहीं होती है. लेकिन उनका व्यवसाय हमेशा फलफूलता रहेगा जब तक कि भारत में अंधविश्वास खत्म नहीं हो जाता. जबकि चिरौंजी ईमानदारी से मानता है कि वे एक दिन किसी जरूरतमंद की मदद करने के लिए अपने पिता के काम को कर रहा है. उनकी असली परीक्षा तब होती है जब वे दो बहनों, कनिका (जैकलीन फर्नांडीज) और माया (यामी गौतम) के स्वामित्व वाले धर्मशाला चाय के खेत में पहुंचते हैं, जहां एक प्राचीन आत्मा उनका इंतजार कर रही है. इस आत्मा को इन दोनों के पिता ने ही हराया था. इस भूत से दो भाईयों की लड़ाई ही इस कहानी का पूरा मजा है.

जबर्दस्त है सेकेंड हाफ

‘भूत पुलिस’ का सेकेंड हाफ वास्तव में फिल्म को ऊपर उठाता है, और यह एक जाहिर सी बात है कि यदि फिल्म मेकर दोनों पार्ट में से एक को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमेशा दूसरे को चुनना पसंद करते हैं. क्योंकि दर्शकों के दिमाग में आमतौर पर यही दर्ज होता है. इसका मतलब यह नहीं है कि पहला पार्ट पूरी तरह से बेकार है. लेकिन यहां पर कॉमिक पंच और डर थोड़ा मिडवे मार्क पोस्ट करते हैं. बेशक, दोनों हिस्सों को संतुलित करते हुए सैफ अली खान बेहतरीन फॉर्म में हैं, अर्जुन कपूर ने काफी बेहतरीन तरीके से उनका साथ दिया है. यामी गौतम छोटी-सी भूमिका में भी एक स्थिरता लाती हैं, जबकि जैकलीन फर्नांडीज की एक्टिंग अब भी मुश्किल टास्क लगता है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनकी स्क्रीन उपस्थिति हमेशा काफी जीवंत होती है. सपोर्टिंग कास्ट के बीच जेमी लीवर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब होती हैं. स्पेशल इफेक्ट वास्तव में बॉलीवुड फिल्मों की तुलना में बहुत अच्छा है, साथ ही सचिन-जिगर के बैकग्राउंड स्कोर और जया कृष्णा गुम्मडि’ए की सिनेमैटोग्राफी के लिए भी एक्ट्रा माक्स दिए जा सकते हैं.

ये रह गईं कमियां 

‘भूत पुलिस’ की कमियों की बात करें तो एक बड़े हिस्से के लिए, फिल्म आपको थोड़ा भटकती नजर आती है. लेकिन आपको आश्चर्य होता है कि यह तुरंत अपने पैर कहानी पर जमा लेती है, तो ज्यादातर चीजें ठीक हो जाती हैं. फिल्म के रफ्तार पकड़ने के बाद भी, कुछ पंच और डर वाले सीन्स में बेहतर ढंग से सोचा जा सकता था और फिल्म को निश्चित रूप से और अधिक मजेदार बनाया जा सकता था. साथ ही, यह सही समय है जब हमारे फिल्म निर्माताओं और लेखकों ने आजमाई हुई ‘बूरी आत्मा’, ‘चुड़ेल’ या ‘घोस्ट आउट फॉर वेंजेंस’ रूटीन से परे सोचा. अंत में यही कि फिल्म देखकर निराशा हाथ नहीं लगती. लेकिन भूत से विभूति (सैफ अली खान) और चिरौंजी (अर्जुन कपूर) की जीत होती है या नहीं ये देखने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

source:zeenews

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